Success Story Of IAS Topper Shriya Gupta

By | January 1, 2021

Success Story Of IAS Topper Shriya Gupta: यूपीएससी परीक्षा एक ऐसा एग्जाम है जिसकी तैयारी के दौरान ही कैंडिडेट इतने सबक ले लेता है कि वे जीवनभर काम आते हैं. हालांकि कई बार अपने अनुभवों से सीखना काफी मुश्किल और लंबा हो जाता है. ऐसे में दूसरों से मिलने वाले ज्ञान और अनुभवों का लाभ उठाकर उन गलतियों को करने से बचा जा सकता है. कुछ ऐसा ही मानना है श्रिया गुप्ता का जिन्होंने साल 2015 की यूपीएससी सीएसई परीक्षा पास की और रैंक के मुताबिक आईआरएस सेवा के लिए चयनित हुईं. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में श्रिया ने अपनी गलतियों के बारे में चर्चा की. जानते हैं विस्तार से.

यूपीएसससी नहीं करता किसी सेवा में भेदभाव –

अपना अनुभव शेयर करने से पहले श्रिया एक अच्छी बात कहती हैं कि यूपीएससी कभी किसी सेवा को कम या ज्यादा नहीं आंकता न ही उसके अनुसार व्यवहार करता है. ये हम कैंडिडेट्स होते हैं जो सेवाओं को पायदान देते हैं. मोटे तौर पर देखें तो हम सामान्यतः कहते भी हैं कि फलां आईएएस की तैयारी कर रहा है, न कि यूपीएससी सीएसई की. इस तरह के विचारों से सेवा के महत्व को लेकर मन में कई तरह के दवाब बनने लगते हैं, जिनसे बचना चाहिए. सीएसई एग्जाम देने वाला हर कैंडिडेट आईएएस ही बनना चाहता है. कैंडिडेट्स ने अपने मन में सेवाओं को भी नंबर दिए हुए हैं जैसे सबसे पहले आईएएस फिर आईपीएस फिर आईएफएस वगैरह.

जरूरत है इसे केवल एक एग्जाम के रूप में देखने की न कि सेवा के अनुसार अपने अंदर किसी प्रकार का प्रेशर महसूस करने की. सच तो यह है कि जब तक आपके इरादे नेक हैं, हर सेवा अपने आप में खास और महत्वपूर्ण है.

यहां देखें श्रिया गुप्ता द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू 

प्री को नहीं दिया था महत्व –

श्रिया अपनी सबसे पहली गलती मानती हैं कि वे प्री के लिए ओवर-काफिडेंट थी. उन्हें लगता था कि प्री पास करने में क्या है और उन्होंने पूरा फोकस मेन्स परीक्षा पर किया. पहले प्रयास में उन्होंने जो ध्यान परीक्षा पर देना चाहिए था वैसा नहीं दिया और उससे भी ज्यादा द्रवित करने की बात यह थी कि श्रिया का 0.3 अंकों से प्री परीक्षा में सेलेक्शन नहीं हुआ. वे कहती हैं कि वे ऐसे बहुत से कैंडिडेट्स को जानती हैं जो न के बराबर अंकों से रह जाते हैं. कहने का मतलब यह है कि तीन चरणों की इस परीक्षा में सबसे अधिक जोर प्री पर दें क्योंकि यह बहुत ही मुश्किल चरण हैं, जहां अटक जाने पर गाड़ी आगे ही नहीं बढ़ती और कई बार गाड़ी इतने कम अंकों से अटकती है मन मसोसने के अलावा कोई उपाय नहीं बचता.

रिवीजन पर नहीं किया था फोकस –

श्रिया आगे बताती हैं कि प्री की दूसरी बड़ी गलती यह थी उन्होंने ठीक से रिवीजन नहीं किया था. वे इस बात को मानती हैं कि प्री में इतना ज्यादा पढ़ना होता है और इतना कुछ पढ़ना होता है कि रिवीजन आसान नहीं लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसे कैंडिडेट्स देखें हैं जो एक-दो नहीं पांच से सात बार तक रिवाइज करते हैं. यही एक तरीका है जो आपको प्री में सफल कर सकता है. श्रिया कहती हैं कि मेन्स में फिर भी आपके पास कुछ लिखने या अपनी बात कहने का मौका होता है, भले आपको उसमें कुछ नहीं आता लेकिन प्री में यह मौका भी नहीं मिलता. या तो आता है या तो नहीं आता है, बीच का कोई स्कोप नहीं. इसलिए प्री को पूरी गंभीरता से लेते हुए बार-बार रिवाइज करें.

ऑप्शनल का चुनाव करें सोच-समझकर –

श्रिया कहती हैं कि उनके पहले प्रयास की बड़ी गलती थी गलत ऑप्शनल का चुनाव. जो विषय उन्होंने चुना था उन्हें बाद में समझ आया कि वह ठीक नहीं है. हालांकि अगले साल उन्होंने इस गलती को सुधारा लेकिन बेहतर होगा कि आप पहले ही अटेम्प्ट में सही ऑप्शनल का चुनाव करें ताकि आपका समय भी बचे और तैयारी भी सही दिशा में आगे बढ़ें.

इसके बाद श्रिया ने बात की इंटरव्यू की और बताया कि हालांकि उनका चुनाव उसी साल हो गया जिस साल वे साक्षात्कार देने गईं लेकिन वे साक्षात्कार वाले दिन अत्यधिक नर्वस थी. वे कहती हैं कि इससे भी आपको बचना चाहिए. आप अपनी मेहनत से यहां तक पहुंचे हैं और इस बात पर आपको गर्व होना चाहिए न कि नर्वसनेस.

यूपीएससी दुनिया का अंत नहीं –

अंत में श्रिया इसी बात पर बात खत्म करती हैं कि प्री परीक्षा के एक दिन पहले भी अगर आपको लगे कि तैयारी में कही कोई कमी रह गई है तो परीक्षा देने न जाएं. यकीन मानिए परीक्षा देकर न सेलेक्ट होने के बोझ से कहीं कम परीक्षा न देने का बोझ होता है. अपनी तरफ से पूरी मेहनत और पूरे प्रयास करिए लेकिन तभी भी सेलेक्शन न हो तो परेशान न होइये. यह बात सच है कि इस जॉब की अपनी सिक्योरिटी, पावर और चार्म है लेकिन यह दुनिया का अंत नहीं. अगर अपना 100 प्रतिशत देने के बाद भी सेलेक्शन नहीं हो रहा तो मन छोटा न करें और किसी और फील्ड में हाथ आजमाएं.

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