Success Story Of IAS Topper Rakesh Sharma

By | January 10, 2021

Success Story Of IAS Topper Rakesh Sharma: यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास करने की योजना बनाना किसी भी कैंडिडेट के लिए बहुत बड़ा फैसला होता है. तमाम प्रयास, दिन-रात की मेहनत के बावजूद लोग एक सफलता को तरस जाते हैं. लेकिन ऐसे में राकेश शर्मा जैसे कैंडिडेट भी होते हैं जो जीवन की सबसे अहम कही जाने वाली शक्ति यानी देखने की शक्ति खोने के बावजूद इस फील्ड में आने का हौसला रखते हैं. जहां एक तरफ बड़े-बड़ों के लिए यह एग्जाम पास करना आसान नहीं होता वहीं राकेश ने अपने जैसे और लोगों की मदद करने के उद्देश्य से इस फील्ड में आने का फैसला किया और उनका जज्बा देखिए कि पहली ही बार में सेलेक्ट भी हो गए. आज जानते हैं राकेश शर्मा की सफलता की कहानी.

दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में राकेश ने अपनी जिंदगी के विभिन्न पहलुओं पर बात की साथ ही यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्हें कैसी समस्याएं आयीं और उन्होंने कैसे उनसे पार पाया, इस पर भी चर्चा की.

 

दो साल की उम्र में खोयी आंखों की रोशनी 

राकेश कहते हैं कि जब वे दो साल के थे तो एक दवा के रिएक्ट कर जाने के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई. काफी इलाज के बावजूद कोई फायदा नहीं हुआ. राकेश का विजन पूरी तरह चला गया और वे बिलकुल भी देख नहीं सकते.

यह समय उनके माता-पिता के लिए भी बहुत कठिन था पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. लोगों ने कुछ साल बाद उन्हें यहां तक सलाह दे डाली कि इसे किसी आश्रम में डाल दो ताकि ठीक से पल भी जाएगा और खाने-पीने की भी चिंता नहीं करनी होगी. लेकिन राकेश के मां-बाप ने मन में ठान लिया था कि वे इसे आम बच्चे की तरह ही पालेंगे और कभी इस कमी को उसके दिमाग पर हावी नहीं होने देंगे.

नहीं मिला सामान्य स्कूल में एडमिशन

राकेश बताते हैं कि जब स्कूल जाने की बारी आयी तो बहुत कोशिशों के बावजूद उन्हें सामान्य बच्चों के स्कूल में दाखिला नहीं मिल पाया. मजबूरन उन्हें स्पेशल स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ी. बारहवीं तक सब ऐसा ही चला और उसके बाद जब राकेश को डीयू में एडमिशन मिला तो उनके जीवन में काफी बदलाव आए. यहां से उनका काफिडेंस लेवल काफी ऊपर बढ़ा. वे कहते हैं कि डीयू में होने वाली एक्टिविटीज और वहां के शिक्षक तथा साथियों के प्रोत्साहन से वे न केवल जीवन के तमाम और पहलुओं से वाकिफ हुए बल्कि उनके अंदर कुछ और बड़ा करने की इच्छा ने भी जन्म लिया. मोटे तौर पर कह सकते हैं कि उन्हें यहां वो एक्सपोजर मिला जिसकी उन्हें हमेशा से तलाश थी. इसके बाद राकेश ने कभी मुड़कर नहीं देखा.

राकेश शर्मा का दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं…

ऐसे आए सिविल सेवा के क्षेत्र में 

कॉलेज में होने वाली विभिन्न गतिविधियों के अंतर्गत एक बार राकेश का सामना एक बच्चे से हुआ जो अपना घर छोड़कर भागा था और किसी से अपने बारे में बात नहीं करता था. राकेश ने उसको डील किया, धीरे-धीरे वह सामान्य हो गया और अपने घर वापस लौट गया. उस लड़के के घरवालों ने राकेश को बहुत दुआएं दीं और यहीं से राकेश को लगा कि क्यों न कोई ऐसा काम किया जाए जिससे उस जैसे दूसरे बच्चों की मदद की जा सके. साथ ही विजन न होने से बचपन से लेकर आज तक जो कठिनाइयां उन्होंने फेस की उन्हें भी कम किया जा सके.

दूसरी की सेवा के विचार से राकेश सिविल सेवा के क्षेत्र में कूदे, जिसमें उनके साथियों, शिक्षकों और परिवार ने पूरा सपोर्ट दिया. इसी का नतीजा था कि राकेश ने दिल लगाकर मेहनत की और देख न पाने के बावजूद पहले ही प्रयास में विजेता बनकर निकले.

राकेश की सलाह 

राकेश कहते हैं कि पहले तो स्टडी मैटीरियल मिलने में ही बहुत समस्या आयी उसके बाद यूपीएससी परीक्षा के लिए नोट्स बनाना बहुत जरूरी है उन्हें उसमें भी बहुत परेशानी उठानी पड़ती थी लेकिन ऑप्शन न होने से वे बस दिन-रात लगे रहते थे. अपनी पूरी ताकत से उन्होंने परीक्षा की तैयारी की और इस सफर में उनके शिक्षकों ने उन्हें बहुत सहारा दिया. जहां भी फंसे उनकी आगे बढ़कर सहायता की.

राकेश कहते हैं कि अगर उनके मां-बाप ने उन पर दया दिखायी होती तो वे शायद कभी यहां तक नहीं पहुंचते. सच तो यह है कि उनके परिवार, दोस्तों और शिक्षकों, किसी ने कभी उनके साथ सिम्पैथी नहीं दिखायी और उन्हें हमेशा आम इंसान की तरह ट्रीट किया. इसका फायदा यह हुआ कि उनके अंदर यह कांफिडेंस आया कि वे  भी आम कैंडिडेट की तरह न केवल यह परीक्षा दे सकते हैं बल्कि इसमें सफल भी हो सकते हैं.

राकेश अंत में यही कहते हैं कि हिम्मत रखिए और इस परीक्षा को भी आम परीक्षा की तरह ही देखिए. अगर ठान लिया जाए तो दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं जिसे न किया जा सके. अपनी कमी को कभी भी अपने ऊपर हावी न होने दें और खुद को यह विश्वास दिलाएं कि जो दूसरे कर सकते हैं आप भी कर सकते हैं. इससे सफलता मिलना आसान हो जाएगा.

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