Success Story Of IAS Topper Manish Kumar

By | December 16, 2020

Success Story Of IAS Topper Manish Kumar: कई बार सफलता या असफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कहां के हैं या आपको अपनी जर्नी पूरी करने के लिए कितनी सुविधाएं दी गई हैं. बिहार के मनीष कुमार इसका बढ़िया उदाहरण हैं. एक बहुत ही छोटी जगह से आते हैं मनीष जहां सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं था लेकिन उन्होंने हमेशा से पढ़ाई में अव्वल दर्जे का प्रदर्शन किया. कभी इस बात को आड़े नहीं आने दिया कि उनके पास साधनों की कमी है.

क्लास दस और बारह दोनों में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा. इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कदम रखा और बीटेक की डिग्री ली. यहां उनका प्रदर्शन बहुत ही अच्छा रहा और उन्होंने कॉलेज में टॉप किया. यहीं से कैम्पस प्लेसमेंट में उनका चयन हुआ और वे बीएचईएल में नौकरी करने लगे. दो साल नौकरी करने वाले मनीष को कुछ कारणों से यूपीएससी का ख्याल आया और उन्होंने इस बाबत तैयारी शुरू कर दी. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में मनीष ने बताया अपना यूपीएससी जर्नी का अनुभव विशेषकर ऑप्शनल मैकेनिकल इंजीनियरिंग की तैयारी के बारे में.

देखें मनीष कुमार द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू

आईपीएस की ट्रेनिंग ले रहे थे मनीष जब हुआ आईएएस के लिए चयन –

मनीष ने तीन अटेम्पट दिए और तीनों में उनका सेलेक्शन हुआ. सबसे पहली बार वे इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेस के लिए सेलेक्ट हुए और दूसरी बार की रैंक ने उन्हें पहुंचाया आईपीएस पद पर. तीसरी बार के अटेम्पट का रिजल्ट जिस समय आया मनीष उस समय हैदराबाद में आईपीएस की ट्रेनिंग ले रहे थे. तीसरी बार में अंततः जो वह चाहते थे वह हुआ और उन्हें मन-माफिक सफलता मिली. साल 2017 के प्रयास में मनीष की 84वीं रैंक आयी जिससे उन्हें आईएएस का पद मिला. इस तरह सालों की मेहनत के बाद मनीष मंजिल तक पहुंचे और अपने परिवार के साथ ही उन्होंने अपने गांव का भी नाम रोशन किया.

 

हर बार रखा एक ही ऑप्शनल –

मनीष ने जितनी बार भी यूपीएससी सीएसई परीक्षा दी हर बार उनका ऑप्शनल विषय मैकेनिकल इंजीनियरिंग ही रहा. परीक्षा की तैयारी के विषय में बात करने के अलावा मनीष ने मुख्य तौर पर इस विषय को कैसे तैयार करें इस पर अपने विचार रखें. उन्होंने सबसे पहले इस सब्जेक्ट की तैयारी के लिए किताबों की सूची शेयर कि जो आप वीडियो में देख सकते हैं.

इसके बाद मनीष ने महत्व दिया सिलेबस और पिछले साल के पेपरों को. वे कहते हैं कि इस परीक्षा की तैयारी के लिए जरूरी है कि आप सिलेबस को ठीक से देख लें. जितना ज्यादा इसकी जानकारी आपको होगी उतना आपके लिए बेहतर होगा. इसी तरह पिछले साल के पेपर देखें और यह पता करें कि इस विषय में किस सेक्शन से कैसे प्रश्न आते हैं. जब तक आपको यह नहीं पता होगा कि प्रश्नों का प्रकार क्या होता है तब तक कितनी भी तैयारी कर लें कोई फायदा नहीं होगा.

पेपर हल करें और अपनी कमियां देखें –

मनीष आगे कहते हैं कि लास्ट ईयर के प्रश्न-पत्र देखकर ही न रुकें उन्हें हल भी करें. इससे एक तो आपकी प्रैक्टिस होती है दूसरा यह पता चलता है कि आपके कहां कमी है या किस सेक्शन को हल करने में आपको ज्यादा समय लग रहा है. पता चलने के बाद उसी कमी पर काम करें. दरअसल तैयारी तो हर कोई कर लेता है पर उस तैयारी में कहां कमी है यह हर कोई पता नहीं कर पाता और वहीं मात खाता है. इसलिए बेहतर होगा आप बिलकुल परीक्षा जैसे माहौल में एग्जाम दें और जहां-जहां अटकें, वहां अपनी कमियों को पकड़ते हुए दूर करें.

इसी तरह जब तैयारी एक लेवल तक पहुंच जाएं तो टेस्ट सीरीज जरूर दें. यह परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए बहुत जरूरी है. अगर आप कोचिंग नहीं जा सकते तो घर पर ही पेपर दें लेकिन टेस्ट सीरीज जरूर दें. पांच से छ टेस्ट सीरीज दें और पिछले दस साल के प्रश्न-पत्र हल करें.

सेल्फ स्टडी से करें तैयारी –

इस बारे में बात करते हुए मनीष कहते हैं कि परीक्षा की तैयारी के लिए वे कोचिंग को इतना महत्व नहीं देते. उन्हें लगता है कि मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी होती है जो आपके काम आती है. बिना खुद की पढ़ाई के नैय्या पार नहीं होती. इसके अलावा प्रैक्टिस और रिवीजन एक ऐसी चीज है जो सफलता में अहम रोल निभाती है.

नोट्स मेंटेन करें और टेस्ट जरूर दें. जितना हिस्सा तैयार होता जाए उतने के टेस्ट लिखते जाएं, पूरा सिलेबस खत्म करने के चक्कर में न पड़ें. टेस्ट सीरीज में अंक अच्छे न आएं तो परेशान न हों और अपनी मेहनत पर विश्वास रखें. कड़ी मेहनत कभी बेकार नहीं जाती.

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