An NGO Moves To Supreme Court For Cancellation Of CBSE Class 10th & 12th Exam Fee For 2020-21 Session

By | October 8, 2020

CBSE Class 10th & 12th Exam Fee: कोविड-19 महामारी और इसकी वजह से अभिभावकों की आर्थिक समस्याओं के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर करके 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों का परीक्षा शुल्क माफ करने का निर्देश सीबीएसई और दिल्ली सरकार को देने का अनुरोध किया गया है.

‘सोशल ज्यूरिस्ट’ नाम के गैर सरकारी संगठन ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 28 सितंबर के आदेश के खिलाफ यह अपील दायर की है. उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में दिल्ली की आप सरकार और केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से कहा था कि इस जनहित याचिका को रिपोर्ट मानते हुये इस पर कानून, नियमों और सरकार की नीतियों के अनुसार तीन हफ्ते के अंदर निर्णय लें.

 

कोरोना के हवाले से की गई है अपील –

इस अपील में कहा गया है कि लॉकडाउन और महामारी की वजह से अभिभावकों की आमदनी या तो खत्म हो गयी है या फिर इतनी कम हो गयी है कि उनके लिये अपने परिवार का दो समय पेट भरना भी मुश्किल हो रहा है. ऐसे में सीबीएसई की बढ़ी हुई एग्जाम फीस उनका तनाव और बढ़ा रही है. प्ली में आगे कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने देश में 30 लाख और अकेले दिल्ली में तीन लाख छात्रों को राहत से वंचित कर दिया है. याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के माध्यम से अपील में कहा गया है कि सीबीएसई को या तो परीक्षा शुल्क माफ करने का निर्देश देना चाहिए या फिर देश में केन्द्र को पीएम केयर्स फंड से इस धन का भुगतान करना चाहिए. यही नहीं दिल्ली के छात्रों के लिये आप सरकार को भी ऐसा ही करने का निर्देश दिया जाना चाहिए.

अब बढ़ गई है फीस –

याचिका में कहा गया है कि 2018-19 तक 10वीं और 12वीं की सीबीएसई की परीक्षा का शुल्क न्यूनतम था लेकिन 2019-20 से बोर्ड ने इसमे कई गुणा वृद्धि कर दी है. बोर्ड ने वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिये 10वीं के छात्रों से 1500 से 1800 रुपए और 12वीं कक्षा के छात्रों से 1500 से 2400 रुपए परीक्षा शुल्क की मांग की है.

अपील के अनुसार दिल्ली सरकार ने पिछले साल 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों की परीक्षा शुल्क का भुगतान सीबीएसई को किया था लेकिन 2020-21 में वित्तीय संकट का हवाला देते हुये उसने ऐसा करने से इंकार कर दिया है. एनजीओ ने कहा है कि ऐसी परिस्थितियों में सीबीएसई को परीक्षा शुल्क माफ करने या विकल्प के रूप में केन्द्र सरकार को पीएम केयर फंड या दूसरे उपलब्ध स्रोतों से इसका भुगतान करने का निर्देश दिया जाये.

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